Khana भोजन के निम्न बाते जो आप नहीं जानते

By D.G Marketing - 2:48 pm

                Khana हमरे जीवन के लिए अत्यावश्क है। इसके अभाव में मृत्यु निश्चित् है। Khana वाले पदार्थ से हमें कार्य हेतु ऊर्जा प्राप्त होती है एवं शारीरिक विकास होता है। जिस प्रकार का हम Khana ग्रहण करेंगे वैसा ही हमारा स्वास्थ्य होगा। Khana मुख्यतः अन्न, दाले, दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादन, सब्जियाँ, माँस, अण्डे तथा मछली आदि से तैयार किया जाता है।

            प्रारम्भ में मानव Khane की खोजन के लिये स्थान-स्थान पर घूमता रहता था, कालान्तर में उसने खाद्य पदार्थ उत्पन्न करना प्रारम्भ किया। जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ खाद्य-पदार्थों का उत्पादन भी बढ़ा। विविध खाद्य पदार्थ उत्पन्न किए गये, किन्तु यह स्थिति सदैव बनी नहीं रह सकी। वर्तमान में कई विकास मान देशों में अब उत्पादन जनसंख्या की तुलना में काफी कम हो रहा है।

            जहाँ एक ओर खाद्य पदार्थों का उत्पादन, जनसंख्या की तुलना में नहीं बढ़ पा रहा है, वहाँ विक्रय के अभाव, खपत में कमी, संचार वाहनों के साधनों में कमी तथा महंगा होने के कारण देश के विभिन्न भागों में काफी मात्रा में खाद्य पदार्थ सड़ कर नष्ट हो रहे हैं, इससे उत्पादन कर्ता को हानि तो होती है, किन्तु सम्पूर्ण देश की यह हानि मिलकर अरबों-खरबों रुपयों तक पहुँच जाती है। इस प्रकार सड़ कर नष्ट होने वाले खाद्य एवं भोज्य पदार्थों के संरक्षण की विभिन्न विधियों के द्वारा संरक्षित कर रखा जा सकता है।

            यहाँ Khanaसंरक्षण से तात्पर्य है कि खाद्य पदार्थों के नष्ट होने के कारणों को दूर कर या कुछ समय तक हटाकर उसका लम्बे समय तक उपयोग करना।

            यह तो विदित है कि वर्तमान समय में जनसंख्या की तुलना में खाद्य पदार्थों का उपयोग कम हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में खाद्य पदार्थ यदि सड़कर नष्ट हो जायें तो हमें खाद्यसमस्या का सामना करना ही पड़ता है। अतः खाद्य सामग्री या भोज्य पदार्थों का संरक्षण कर हम देश हित तो करते ही हैं, साथ ही बढ़ती हुई कीमतों को भी स्थिर करने में सहायता कर सकते हैं।

Khana

            Khana संरक्षण जितना विदेशों में लोकप्रिय है तथा व्यवहार में लाया जा रहा है इतना भारत में लोकप्रिय नहीं है। इसका कारण जब सामान्य को Khana संरक्षण सम्बन्धी प्रयुक्त जानकारी नहीं है, जिन लोगों को यह जानकारी है, वे इसे अपना कर लाभ उठा रहे हैं।

            हमारे यहाँ मनुष्य अब अधिक व्यस्त रहने लगे हैं, ऐसी स्थिति में संरक्षित भोज्य पदार्थ की ओर ध्यान रखा जाना स्वाभाविक ही है। भोज्य पदार्थों के संरक्षण से धन की बचत तो होती ही है, साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम सामग्री भी उपलब्ध होती है। आज हमें शहरों में वर्ष पर्यन्त विभिन्न प्रकार के फल एवं साग- सब्जी उपलब्ध होती है।

            फल एवं साग-सब्जी हमारे Khana का अभिन्न अंग है, ये हमारे Khana का आवश्यक अंग है जो स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त आवश्यक है। सब्जियाँ एवं फल सामान्यता जल्दी ही पककर शीघ्र ही सड़ जाते है। अतः काफी लम्बे समय तक रखा जाना सम्भव नहीं है।

            हमारे देश में जन सामान्य के Khana में फल एवं सब्जियों का समुचित उपयोग नहीं कर पाने का कारण उनके परिवेश में उनका उपलब्ध नहीं होता हैं। अन्य कारण इनका महंगा होना, इनका भण्डारण आदि है।

            उपर्युक्त परिस्थितियों का समाधान इन पदार्थों का संरक्षण करके किया जा सकता है। जल फल अथवा सब्जी का मौसम होता है, तब इनका उत्पादन अधिक होने से यह सस्ती दर पर मिलती है। ऐसी स्थिति में भोज्य पदार्थ संरक्षण कर उपयोग में लाया जा सकता है।

            फल जैसे-जैसे पकते जाते है तो उनमें रासायनिक क्रिया तेज होती जाती है, परिणाम स्वरूप इनके गठन, रंग, स्वाद बनावट आदि में परिवर्तन होने लगता है और अन्ततः वे सड़कर नष्ट हो जाते हैं। केवल रासायनिक अभिक्रिया ही भोज्य पदार्थों को नष्ट नहीं करती, इन भोज्य पदार्थों में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु भी भोज्य पदार्थों को सड़ाकर नष्ट कर देते हैं। यदि किन्हीं विधियों द्वारा ये सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा होने वाली क्रिया तथा रासायनिक अभिक्रिया रोक दी जाने या इनकी क्रिया दर में कमी किया जाना सम्भव हो सके तो भोज्य सामग्री का उपयोग लम्बे समय के बाद भी किया जाना सम्भव हो सकता है।

            Khana संरक्षण का सरलतम अर्थ है इसे आने वाले समय में प्रयोग में ला सकने हेतु सुरक्षित रखना। कुछ लेखकों की अवधारणा यह भी है कि Khana संरक्षण का अभिप्राय है कि भोज्य सामग्री तैयार हो चुकने के बाद 15 दिन तक उसे सुरक्षित रखा जाकर प्रयोग में लाया जाये।

             यहाँ पर संरक्षित भोज्य सामग्री में उसका प्राकृतिक स्वाद लम्बे समय तक बनाये रखना आवश्यक है।                    संरक्षण हेतु काम में लाई गई विधि, उत्पादन के प्रकार, गन्ध, बनावट आदि पर अपना प्रभाव छोड़ती है-अधिकांश उत्पादन की किस्म काफी उन्नत होती है।

             Khana संरक्षण के लिये प्राचीन काल से अब तक कई विधियाँ व्यवहार में लाई जाती रही है। इन्हें ठण्डे स्थान पर रखना तथा केनिंग करना प्रमुख है। ये दोनों विधियाँ तुलनात्मक रूप से अधिक महंगी है। अत: जन साधारण इसे प्रयोग में नहीं ला सकता है। अतः इस बिन्दु को इष्टिगत रखकर इस पुस्तक में कुछ ऐसी विधियों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है जो हमारे देश के जलवायु के लिए उपयुक्त है। इनमें भोज्य पदार्थों को सूखाकर संरक्षित करना प्रमुख है। संरक्षित भोज्य पदार्थ एवं भोज्य पदार्थ संरक्षण हमारे लिए निम्न प्रकार उपयोगी है-

1. संरक्षित खाद्य सामग्री का उपयोग उस समय भी किया जा सकता है, जब यह उपलब्ध (प्राकृतिक दृष्टि से) नहीं होती हो।

2. फल तथा सब्जियाँ जब प्रचुर मात्रा में और उत्पादन के मौसम में हों, तब सस्ती होती हैं, उस समय खरीदकर इन्हें संरक्षित किया जा सकता है। यह संरक्षित भोज्य पदार्थ उस समय प्रयोग में लाये जा सकते हैं, जब या तो ये महंगे हो या उपलब्ध ही नहीं हो।

3. संरक्षित भोज्य पदार्थ उस स्थान पर भी सुविधापूर्वक ले जाकर उपयोग में लाया जा सकता है, जहाँ ये उत्पन्न नहीं होते हो।

4.संरक्षित सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाना ले जाना अधिक सरल है, जब कि ताजा भोज्य पदार्थ काफी दूर स्थान पर ले जाये जाने पर मार्ग में ही सड़ कर खराब हो जाते हैं।

5. संरक्षित सामग्री के भण्डारण के लिए थोड़े (कम) स्थान की आवश्यकता होती है। सुरक्षित भोज्य पदार्थ, ताजे भोज्य पदार्थों की अपेक्षा कम पैसे में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। ताजा फल व सब्जियाँ ज्यादा स्थान घेरती हैं।

6.संरक्षित सामग्री का उपयोग जब चाहें (प्रत्येक मौसम में) किया जा सकता है। रुचि अनुसार प्रयोग से Khana सुरुचिपूर्ण हो जाता है।

7.संरक्षण के फलस्वरूप कुछ भोज्य पदार्थों की पौष्टिकता बढ़ जाती है, जैसे जैम तथा जैली।

8. सब्जियों एवं फल के संरक्षण से इनके उत्पादनकर्ता (किसाना) को राहत मिलती है, क्योंकि इससे इनका उत्पादन सड़कर नष्ट नहीं होता है।

Khana खराब होने के कारण 

            खाद्य सामग्री को संरक्षित कर खराब होने से बचाया जाता है और इसे लम्बे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है। खाद्य सामग्री के खराब होने की समस्या एक बहुत बड़ी समस्या है। बाजार से खाद्य सामग्री लाने के बाद सबसे पहले हम यह देखते है कि इसे किस तरह से रखा जाये ताकि ये ज्यादा से ज्यादा समय तक बिना खराब हुए प्रयोग में लाई जा सकें। कुछ भोज्य पदार्थ बहुत ही जल्दी खराब हो जाते हैं, जैसे दूध, हरी सब्जियाँ व फल। जबकि कुछ भोज्य पदार्थों को हम काफी समय तक बिना खराब हुए संग्रहित कर सकते हैं। भोज्य सामग्री का खराब होना उसमें उपस्थित पानी की मात्रा पर निर्भर करता है। जिन भोज्य पदार्थों में पानी की मात्रा अधिक होती है, वे भोज्य पदार्थ शीघ्र खराब हो जाये है, बजाय उन भोज्य पदार्थों के जिनमें पानी की मात्रा कम होती है। इसलिये अनाज व दालों की अपेक्षा सब्जियाँ व फल शीघ्र ही खराब हो जाते हैं। सब्जियों में भरी हरी पत्ती वाली सब्जियाँ जिनमें पानी की मात्रा अन्य सब्जियों से अधिक होती है, जल्दी खराब हो जाती है। अतः खाद्य सामग्री की सुरक्षित रखने की किस्म के अनुसार उन्हें तीन भागों में बाँटा गया है

1. खराब होने वाली सामग्री :- इनमें अनाज, दालें तथा शक्कर मुख्य हैं। इन्हें कुछ माह अथवा वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

2. कम खराब होने वाली सामग्री :- यह वह सामग्री है जिसे उचित विधि से भण्डारण करके कुछ सप्ताह रखी जा सकती है इसमें प्रमुख है-आलू, सेव तथा कुछ फल।

3. खराब होने वाली सामग्री :- यह वह सामग्री है जिसे नहीं रखा जाय तो वह सड़कर खराब हो जाती है जिसमें दैनिक आवश्यकता की वस्तुएँ है, जैसे दूध, दही, अण्डे, माँस, अधिकाँश फल तथा सब्जियाँ ऐसी हैं, जिन्हें थोड़े दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

            इस प्रकार खराब होने वाली सामग्री की थोड़ी खराब होने वाली सामग्री की तुलना में शीघ्र खराब हो जाती है। खाद्य सामग्री एक बार खराब हो जाने पर उपयोग में नहीं लाई जा सकती है और उसे फैंकना ही पड़ता है।

भोज्य पदार्थ के खराब होने के कारण

Khana-Kharab

            भोज्य पदार्थ के खराब होने के अनेक कारण है, भोज्य पदार्थ कितने समय तक बिना खराब हुए रखा जा सकता है, यह बहुत कुछ भोज्य पदार्थ की संरचना पर निर्भर करता है।

            भोज्य पदार्थ में यीस्ट की वृद्धि से उसका खीमीरीकरण हो जाता है जिससे कि भाजन में अल्कोहल तथा कार्बन डाई आक्साइड उत्पन्न होते हैं, ये भोज्य पदार्थ में खट्टापन उत्पन्न कर देते हैं।

1. सूक्ष्म जैविक क्रियाएं-

प्रत्येक प्रकार की खाद्य वस्तुओं में सूक्ष्म जीवाणु सदैव उपस्थित रहते है और अनुकूल परिस्थितियों में वृद्धि करते रहते है, जिसमें Khana खराब होने की संभावना बनी रहती है। निम्न सूक्ष्म जीवाणु खाद्य पदार्थों को नष्ट करने में सक्रिय योगदान देते हैं।

(1) मोल्ड

(2) यीस्ट

(3) बैक्टीरिया

            इन जीवाणुओं की वृद्धि के लिए एक निश्चित ताप एवं आद्रता की आवश्यकता होती है  तथा आवश्यक ताप व आद्रता मिलते ही Khane में इनकी वृद्धि बहुत तीव्र गति से शुरु हो जाती है, जिससे भोज्य पदार्थ खराब हो जाता है।

(अ) मोल्ड:- यह Khane पर कभी-कभी एक रंगीन परत के रूप में दिखाई पड़ता है। एक बार जब भोज्य पदार्थ पर मोल्ड पनप जाती है, फिर उसे उपयोग में लाने योग्य नहीं माना जा सकता। मोल्ड के विकास के लिए योस्ट तथा बैक्टीरिया की तुलना में कम आर्द्रता की आवश्यकता पड़ती है। यह साधारण ताप पर भी अच्छी तरह विकसित हो सकता है। इसके विकास के लिए उपयुक्त ताप 25 डिग्री से० से 35 डिग्री से० है। इनमें से कुछ मोल्ड तो 0° से० ताप पर ही विकसित होते देखे गये हैं । खाद्य पदार्थ पर इनके विकास के लिये ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसलिये इन्हें कभी-कभी 'एरोबिक' कहते है।

(ब) यीस्ट:- खाद्य पदार्थ पर यीस्ट फंगस जैसी परत के रूप में दिखाई पड़ती है। यह खाद्य पदार्थों के लिये लाभदायक या हानिकारक हो सकती है। यीस्ट से फलों का रस, गीला आटा आदि नष्ट हो जाते हैं। इसका विकास पानी की उपस्थिति में होता है। इसको मोल्ड की अपेक्षा अधिक आर्द्रता की आवश्यकता पड़ती है। यीस्ट ऑक्सीजन की उपस्थिति में बहुत बढ़ती है। ऑक्सीजन की अनुपस्थितिमें भी यह धीरे-धीरे बढ़ती है।

(स) यीस्ट:- भोज्य पदार्थों में बैक्टीरिया के विकसित होने पर ये लिपलिपा, गंध देने वाला, दिखने में खराब और अरुचिकर हो जाते हैं। बैक्टीरिया के विकास के लिये मोल्ड या यीस्ट की तुलना में आर्द्रता की अधिक आवश्यकता होती हैं। ये 20 डिग्री से० से45 डिग्री से० ताप पर खूब बढ़ते हैं। प्रतिवाद स्वरुप यह पाया गया है कि कुछ बैक्टीरिया-5 डिग्री से० से-7 डिग्री से० पर भी विकसित होते है। कुछ बैक्टीरिया के लिये ही 45 डिग्री से० से ऊपर आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है।

            बाहरी स्त्रोत से कभी कई बैक्टीरिया खाद्य सामग्री में आ मिलते है। जिससे वह खराब हो जाती है। ऐसी स्थिति में इनकी क्रिया काफी बढ़ जाती है। फलस्वरूप खाद्य सामग्री को सुरक्षित रख पाना कठिन हो जाता है। भोज्य पदार्थ जिन अन्य कारणों द्वारा खराब हो सकते हैं, उनमें जानवर, पेड़, जल, मिट्टी, वायु तथा असावधानी से रख रखाव आदि प्रमुख हैं।

2. एन्जाइम अभिक्रियाएं

            एन्जाइम प्राकृतिक रूप से जीव जन्तुओं तथा वनस्पति के कोशिका (Cell) में पाये जाते हैं जो इसके मर जान पर भी सक्रिय रहते हैं। व भोज्य पदार्थों में परिवर्तन कर सकते हैं। एन्जाइम क्रिया के कारण ही कच्चा फल तोड़ लेने पर वह भण्डारण के समय पक जाता है। तो वह एन्जाइम के कुप्रभाव से बचाने के लिये यह आवश्यक है कि ऐसे प्रयास किये जाये जिससे एन्जाइम को निष्क्रिय किया जा सके। एन्जाइम को इष्मा द्वारा निष्क्रय किया जा सकता है। उदाहरर्णाथ-भोज्य पदार्थों की डिब्बा बन्दी करके। Khana सामग्री में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों से वसा, तेल आदि भी नष्ट हो जाते हैं।

घरों में संरक्षित खाद्य सामग्री के नष्ट होने के कुछ सामान्य कारण-

1. ऐसे फल तथा सब्जियों का चयन करना तो ताजा नहीं हैं, कच्चे है या अधिक पके हुए है।

2.खाद्य सामग्री को त्रुटिपूर्ण ढंग से तोलना।

3.बहुत अधिक या कम पकाना।।

4.उचित विधि का प्रयोग नहीं करना।

5. बोतल, जार, डिब्बा तथा अन्य पात्रों को कीटाणुरोधी नहीं करना।

6.संरक्षित सामग्री को अच्छी तरह ढक कर नहीं रखना।

7. त्रुटिपूर्ण तथा अनुचित विधि में संरक्षित करना।

8.संरक्षण के लिये शक्कर का विलपन आदि की वांछित मात्रा नहीं लेना।

9.अनावश्यक या थोड़ा या अधिक मात्रा में संरक्षित करने वाले पदार्थों को मिलाने से।

10. वांछित मात्रा में अधिक या कम सुगन्धी, रंग या मसाले मिलाने पर।

11. गीले या गन्दे चम्मच द्वारा संरक्षित सामग्री को मिलाने पर।

12. संरक्षित सामग्री में उपस्थित अत्याधिक आर्द्रता से।

  • Share:

You Might Also Like

0 Post a Comment