Food Poisoning In Hindi

By D.G Marketing - 4:36 pm

फूड पॉइजनिंग 


            जो भोजन हम जीवन और अछे स्वास्थ्य के लिए हमेशा ग्रहण करते रहते हैं कभी-कभी वही भोजन ग्रहण करने पर हम बीमार हो जाते हैं इसका कारण Foody आइटम्स में किसी न किसी रूप में Poison का उपस्थित होना है। एसे भोजन को खाने पर Food Poisoning हो सकती है।

            Food Poisoning से पेट और सिर में दर्द होने लगता है कभी-कभी दस्त और उल्टियाँ भी होने लगती है बीमार को कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती है सामान्य रूप से लक्षण 2 से 24 घन्टे के अंदर दिखाई देने लगते हैं।

            यह ज़रूरी नहीं कि Poisoned फ़ूड आइटम्स ग्रहण करने वाले सभी व्यक्तियों पर विषाक्त भोजन समान रूप से असर डाले, यह असर किसी पर ज्यादा तो किसी पर कम भी पड़ सकता है। यह लक्षण किसी पर जल्दी दिखाई दे जाते हैं जबकि किसी किसी पर ये बहुत समय बाद ज़ाहिर होते हैं।

Food Poisoning के लक्षण ज़ाहिर होते ही DR.की सहायता तत्काल प्राप्त की जानी चाहिये नहीं तो फूड पॉइजनिंग शरीर पर कई हानिकारक असर छोड़ सकती है कभी-कभी तो इसके असर से मृत्यु भी हो जाती है।


food poisoning symptoms in hindi

Food Poisoning के सामान्य लक्षण

1. अत्यधिक पानी जैसी उल्टियाँ

2. उल्टी दस्त (डायरिया)

3. जल्दी-जल्दी दस्त का लगना जिनमें खून भी आ सकता है।

4. पेट में दर्द

5. सरदर्द

6. बुखार

उपर के लक्षण में से कभी-कभी एक या दो लक्षण ज़ाहिर होते है तो कभी- कभी सारे लक्षण एक साथ भी ज़ाहिर हो सकते हैं।

Food Poisoning के कारण 

1. फ़ूड आइटम्स  का सही से चयन नहीं किया जाना।

2. फ़ूड आइटम्स को ठीक से नहीं पकाया जाना।

3. फ़ूड आइटम्स का Storage व Protection गलत ढंग से करना।


फ़ूड आइटम्स निम्न कारणों से Toxic बन सकते हैं

1. Chemical Substances 

2. Poisoned पौधों द्वारा 

3. Bacteria व उनके Poison द्वारा 


1. Chemical Substances 

कुछ Chemical Substances अत्यन्त ही जहरीले होते है उनकी भोजन में उपस्थिति के फलस्वरूप शरीर पर जल्द से हानिकारक असर पड़ता है। Chemical Substances द्वारा उत्पन्न Food Poisoning जल्दी से असर डालती है यदि उपचार में देरी हो जाये तो मृत्यु तक होने की सम्भावना रहती है।

ये Chemical Substances भोजन में भी उपस्थित हो सकते है अथवा गलती से भोजन में मिल भी जाते है। जिंक, सीसा, आर्सेनिक तथा सोडियम फ्लोराईड आदि ऐसे Chemical Substances है यदि वातावरण या भूमि में लेड (सीसा) उपस्थित हो तो उसके कण फ़ूड आइटम्स में मिलकर उसे Toxic बना देते है फलस्वरूप फूड पॉइजनिंग हो जाती है।

2. Toxicपौधों द्वारा 

कुछ पौधे जहरीले भी होते है यदि वे या उनका कुछ भाग भोजन में मिल जाये तो Food Poisoning हो जाती है जैसे कुकुर मुत्ता की कुछ किस्में अत्यन्त Poisoned होती है यदि खाने वाली किस्में के स्थान पर यदि इन किस्मों का चयन कर उपयोग कर लिया जाये तो इनका असर शरीर और स्वास्थ्य पर अत्यन्त ही हानी कारक होता है। कभी-कभी पालतू पशु (जैसे गायें, भैंसे आदि) जंगल में घास चरते समय कोई Poisoned पौधा खा लेती है तो उनके दूध में उस पौधे का Poison उपस्थित हो सकता है ऐसे Poisoned दुग्ध या इससे बनी वस्तुओं के सेवन से फूड पॉइजनिंग हो जाती है।

इसी प्रकार यदि मूंगफली का Storage अच्छी तरहा नहीं किया जाने पर यदि इसमें नमी उपस्थित रह जाने पर एक Poison जिसे अफलाटोक्सिन(Aflatoxin) कहते है उत्पन्न हो जाता है इसका असर स्वास्थ्य पर हानिकारक असर डालता है। इसी प्रकार आलूओं के ठीक से Storage नहीं करने पर भी थोड़े समय बाद हरे-हरे रंग के अंकुर फूटने लगते है जिनमें सोलनिन (Solanine) नामक पदार्थ होता है इसका सेवन करने पर भी शरीर और स्वास्थ्य पर हानिकारक असर पड़ता है।

3. Bacteria तथा उनके Poison द्वारा 

फ़ूड आइटम्स का चयन, पकाना, Storage और Protection सही विधि से नहीं किया जाने पर उसमें Bacteria उत्पन्न हो जाते है । यदि फ़ूड आइटम्स में Bacteria उत्पन्न न हो तो भी वातावरण से उसमें सम्मिलित हो सकते है। ऐसे खराब फ़ूड आइटम्स से Food Poisoning होने की सम्भावना रहती है। जहाँ एक और कुछ Bacteria स्वयं फूड पॉइजनिंग के लिये जिम्मेदार होते है वही दूसरी ओर कुछ Bacteria भोजन में Poison छोड़ देते है। जिसका सेवन करने पर मनुष्य रोग ग्रस्त हो जाता है Bacteria के कारण होने वाली Food Poisoning कई प्रकार की हो सकती है उनमें से कुछ मुख्य प्रकार निम्र है

1. बोट्यू लिज्म फूड पॉइजनिंग (Botulism food poisoning)

2. सालमोनेला फूड पॉइजनिंग

3. स्टैफिलोकोकल फूड पॉइजनिंग

1. बोटयू लिज्म Food Poisoning 

यह Food Poisoning एक प्रकार के Bacteria क्लास्ट्रीडियम बोटयू लिज्म के द्वारा एक्सोटोक्सिन छोड़ने के फलस्वरूप होती है। यह Bacteria वातावरण में उपस्थित रहता है। घरों में फ़ूड आइटम्स की कैनिंग तथा बाटलिंग करते समय सफाई ठीक से नहीं करने से संरक्षित फ़ूड आइटम्स में यह उपस्थित रह जाता है इस प्रकार के फ़ूड आइटम्स को सेवन के फलस्वरूप यह फूड पॉइजनिंग हो जाती है। 12 से 36 घन्टे में इसके सम्पूर्ण लक्षण दिखाई देने लगते है। इस प्रकार की Food Poisoning सर्वाधिक हानिकारक होती है क्योंकि इससे गले की माँस पेशोयों पर असर पड़ता है जिससे भोजन निगलने में अत्यन्त कठिनाई होती है औरआँखों से धुंधला दिखाई देने लगता है।

2.सालमोनेला Food Poisoning

यह Food Poisoning पशुजन्य खराब फ़ूड आइटम्स के उपयोग से होती है जैसे खराब मछली, माँस, दुग्ध और दुग्ध पदार्थ चूहों, के शरीर में भी यह Bacteria उपस्थित रहता है। उनके मल-मूत्र से यह फ़ूड आइटम्स में मिल जाता है ऐसे फ़ूड आइटम्स के सेवन से यह फूड पॉइजनिंग हो जाती है। इसके लक्षण प्रयः 12 से 24 घन्टों में ज़ाहिर हो जाते हैं। इसमें उल्टी, दस्तें, पेट तथा सिरदर्द एकदम से प्रारम्भ हो जाते हैं।

3. स्टैफिलोकोकल Food Poisoning

यह Food Poisoning स्टैफिलोकोकर ऑरस Bacteria के द्वारा एन्टरोटोक्सिन त्यागने फलस्वरूप होती है यह Bacteria वातावरण में हवा, मिट्टी में उपस्थित हो सकता है इससे दूध तथा दूध से बने पदार्थ और कच्ची सब्जियों और फलों का सलाद खराब हो सकता है ऐसे खराब फ़ूड आइटम्स के सेवन करने के 1 से 6 घन्टे के भीतर इसके लक्षण दिखाई देना प्रारम्भ कर देते हैं। इसमें दस्तें लगना, उल्टी होना प्रारम्भ हो जाता है कभी-कभी पेट में बाँयठे (Abdominal Craups)आना भी शुरु हो जाते हैं। इसलिए फूड पॉइजनिंग अत्यन्त हानिकारक है इससे निम्न सावधानियाँ रखने पर बचा जा सकता है।

1. फ़ूड आइटम्स का चयन और स्वच्छता

2. Storage के समय शुष्क और ठण्डे स्थान पर Storage करे 

3. अवशीतन के समुचित प्रयोग द्वारा

4. डिब्बाबन्द फ़ूड आइटम्स के उपयोग में लाने से पूर्व सम्पूर्ण जाँच करे।


Food Poisoning से कैसे बचे 

            अनुभव की बात है कि कभी-कभी जिस फ़ूड आइटम्स को सूरक्षित किया गया है वह कुछ ही समय बाद खराब होने लगता है तथा उपयोग करने लायक नहीं रहता। ऐसे खराब फ़ूड आइटम्स के प्रयोग से Food Poisoning होने का हमेशा डर बना रहता है इसलिए खराब फ़ूड आइटम्स को फेंकना ही ज़रूरी है। इससे मेहनत और समय दोनों की  बरबादी होती है। इसलिए यदि फ़ूड आइटम्स संरक्षण से पहले से लेकर यूज़ में लाने तक के अलग -अलग पदों (steps) पर यदि कुछ सामान्य सावधानियाँ रखी जाये तो कुछ नुकसान से बचा जा सकता है। खाद्य पदार्थ संरक्षण में गलतिया होने की संभावना इन तीन Steps पर रहती है

1. पूर्व संरक्षण पद पर

2.संरक्षण के समय

3. संरक्षण के बाद उपयोग में लाने तक

            यदि तीनों ही पदों पर यदि सामान्य गलतियों का ध्यान रखा जाये तो फ़ूड आइटम्स को अधिक लम्बे समय तक बिना खराब हुए रखा जा सकता है। फ़ूड आइटम्स का संरक्षण करने से पहले उसका चयन बहुत ही महत्त्वपूर्ण है इसके लिये कुछ सावधानियाँ रखी जानी चाहिये।

1. जल्दी खराब होने वाले फ़ूड आइटम्स जेसे सब्जियों, फल आदि को उसी समय खरीदना या उपलब्ध करना चाहिये जब उसके ठीक बाद ही उनका संरक्षण करना हो। दो चार दिन रखे फ़ूड आइटम्स इसके लिये उपयोगी नहीं रहते हैं

2.संरक्षण हेतु यूज़ किये जाने वाले फल एवं सब्जियों आदि एकदम ताजा होने चाहिये उनका कोई भी भाग खराब और सड़ा गला नहीं होना चाहिये क्योंकि खराब भाग अच्छे भाग को जल्दी से खराब कर देता है। यदि उसका कोई भाग खराब हो तो उसे संरक्षण से पहले सावधानी से अलग कर लिया जाना चाहिये।

3.संरक्षण हेतु प्रयोग किये जाने वाले सब्जियां एवं फल न तो कम पके हुए होने चाहिये। फ़ूड आइटम्स का जिस रूप से संरक्षण किया जाना हो उसी प्रकार के फल एवं सब्जियों का चयन किया जाना चाहिये।

4.फ़ूड आइटम्स सुरक्षित करने के लिए जैसे शक्कर, तेल, मिर्च- मसाले, संरक्षण हेतु यूज़ पदार्थ भी पूर्णतया शुद्ध होने चाहिये।

5.सुरक्षित करने के लिए यूज़ किये जाने वाले मसाले बाजार से साबुत ही खरीद कर घर पर ही कुटवाने चाहिये। ये शुद्ध एवं अच्छे रहते हैं।

6.जिन बर्तन में संरक्षित फ़ूड आइटम्स रखना हो उसे गर्म पानी में उबाल कर अच्छी तरह कीटाणु रहित कर लिया जाना चाहिये।

संरक्षण करते समय की सावधानियां :-

खाने वाले पदार्थ के ठीक चयन के बाद यदि संरक्षण करते समय पूरी सावधानी नहीं रखने पर भी इसके खराब होने का डर बना रहता है इसलिए कुछ बातें ध्यान में रखी जानी चाहिये-

1.संरक्षण में काम में लिये जाने वाले सभी पात्र, ढक्कन, चम्मच इत्यादि यूज़ से पहले अच्छे से साफ़ करे नहीं तो कीटाणु रहित कर लिये जाने चाहिये। यह बर्तन साफ स्थान पर रखने चाहिये ताकि ये फ़िर से खराब न हो जाये।

2. संरक्षण हमेशा साफ और स्वच्छ स्थान पर किया जाये नहीं तो खाने वाले पदार्थ में कीटाणुओं के मिलने का खतरा हमेशा रहता है।

3. संरक्षण में प्रयुक्त पानी स्वच्छ और ताजा होना चाहिये।

4. संरक्षण करने से पहले हाथों को अच्छी तरहा साबुन से धो लेना चाहिये।

5. संरक्षण करते समय धूल इत्यादि से पूर्णतया बचाना चाहिये।

6. संरक्षण में प्रयुक्त सामग्री सही तोल कर ही काम में लेवें-पदार्थ का सही अनुपात नहीं होने पर भी संरक्षित फ़ूड आइटम्स खराब हो सकता है।

7.फ़ूड आइटम्स और संरक्षित फ़ूड आइटम्स को सदैव अच्छी तरह ढक कर रखना चाहिये।

8.संरक्षण करते समय कम अथवा ज्यादा पकाने पर भी फ़ूड आइटम्स के खराब होने का खतरा रहता है


संरक्षण के बाद रखी जाने वाली सावधानियां

            संरक्षण से पहले और संरक्षण के समय सभी सावधानियों का रखना आवश्यक है उतना ही संरक्षण के बाद भी सावधानियां रखना ज़रूरी हैं। संरक्षण के बाद स्वच्छता और Storage में जरा सी असावधानी के फलस्वरुप सम्पूर्ण संरक्षित फ़ूड आइटम्स खराब हो सकता है इसलिए कुछ बातों का पूरी तरहा ध्यान रखा जाना जरुरी है 

1. संरक्षण के पहले खाने वाले पदार्थ को विधि में बताये अनुसार ही Stored किया जाना चाहिये।

2. जिन संरक्षित फ़ूड आइटम्स को संरक्षण के बाद पूरी तरह Airtight किया जाना हो उनके ढक्कनों पर मोम लगा देना चाहिये ताकि उनमें हवा अन्दर न आ सकें।

3. पुरे संरक्षित फ़ूड आइटम्स को निकालते समय हर रोज़ नहीं छुना चाहिये इससे खराब होने के अवसर बढ़ जाते है एक साथ थोड़ी मात्रा में कुछ समय यूज़ होने वाले पदार्थ की वांछित मात्रा अलग निकाल कर काम में लिया जाना उचित है।

4.स्वच्छ एवं सूखी चम्मच का यूज़ निकालने के समय किया जाना चाहिये। निकालते ही ढक्कन को अच्छी तरह बन्द कर देना चाहिये।

5. संरक्षित फ़ूड आइटम्स का Storage ठण्डे एवं Dry Place पर किया जाये।

6. संरक्षित फ़ूड आइटम्स की समय-समय पर उचित देखरेख किया जाना चाहिये।

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