Tulsi Ke Fayede तुलसी के फायेदे

By D.G Marketing - 11:03 am

तुलसी के फायेदे 

Tulsi-Ke-Fayede


सर्दी खांसी-  शर्बत, तुलसी पत्र मंजरी सहित 50 ग्राम, 15 ग्राम काली मिर्च, 25 ग्राम अदरक को 500 ग्राम पानी में पकाएं, जब पानी चौथाई हिस्सा रहे तो 'छानकर इनमें 10 ग्राम छोटी इलायची के बीज बारीक पीसकर मिलाएं और 200 ग्राम चीनी मिलाकर पकाएं, जब एक तार की चाशनी हो जाए तो छानकर रख लें. मात्रा 1/2 चम्मच से 11/2 चम्मच बच्चों की उम्र के हिसाब से तथा बड़ों को 2 से 4 चम्मच तक दिन में 3-4 दफा चटाएं, इससे खांसी श्वांस, कुकर खांसी, जुकाम आदि बीमारियां ठीक होती हैं. जुकाम व दमा आदि में इसको गर्म पानी में मिलाकर लेना अति लाभ करता है. इससे बच्चों के पाचन में भी सुधार होता है.

तुलसी की चाय- उबलते हुये दो कप जल में 11 तुलसी पत्र अदरक व काली मिर्च, गुड़ डालकर 1 कप रहे तब तक उबालना यह चाय जुकाम, हरारत, शरीर दर्द, थकावट दूर करती है एवं सर्वथा हानिरहित है. मलेरिया फैलने पर तुलसी व काली मिर्च की चाय पीते रहने से रोग से बचाव होता है.

मंदाग्नि- 10 ग्राम तुलसी का रस काली मिर्च का चूर्ण 5 ग्राम तथा शहद 5 ग्राम मिलाकर पीने से मंदाग्नि मिटती है.

अर्श- तुलसी का नित्य सेवन करने से तथा उसके स्वरस को अर्श के अंग पर लगाने से अर्श मिट जाते है. 

पेट में कृमि- तुलसी की 11 पत्तियों को 2 ग्राम बायबिडंग के साथ पीसकर सुबह शाम पानी के साथ सेवन करने से पेट के कृमि मर जाते हैं.

संग्रहणी- 5 ग्राम तुलसी के चूर्ण में 5 ग्राम शक्कर मिलाकर उसका नित्य सेवन करने से संग्रहणी का रोग मिटता है.

मूत्रकृच्छ-10 ग्राम तुलसी के बीज 100 ग्राम पानी में रात को भिगो दीजिए. प्रात:काल उन्हें अच्छी तरह पीसकर शक्कर के साथ लेने से मूत्र कृच्छ में लाभ होता है.

पेचिस- तुलसी की 5 सूखी पत्तियों और 2 ग्राम काले नमक को 50 ग्राम दही में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है.

दाद- तुलसी की पत्तियां 20 ग्राम और लहसुन की एक कली पीसकर उसका लेप करने से दाद मिट जाती हैं.

चर्म रोग- (1) तुलसी की जड़ की मिट्टी शरीर पर रगड़कर थोड़ी देर के बाद स्नान करें, फिर शरीर को भीगे वस्त्र से पोंछ डालने से चर्म रोग मिट जाता है. निरोगी अवस्था में ऐसा करने से चर्म रोग होने का भय नहीं रहता. (2) तुलसी की पत्तियां तथा नीम की पत्तियां किसी भी चर्म रोग पर लगाने से लाभ होता है.

सर्दी खांसी- तुलसी की 11 पत्तियां 2-3 काली मिर्च के दाने अदरक का एक छोटा टुकड़ा तथा चुटकी भर सेंधा नमक एक कप पानी में डालकर उबालिए. आधा कप पानी रह जाने पर उतारकर छान लीजिए इसके 3 भाग करके पीने से सर्दी खांसी मिट जाती है. तुलसी एक कफ नाशक औषधि है.

वात शोथ- तुलसी के रस में काली मिर्च का चूर्ण और शुद्ध घी मिलाकर पीने से वात शोथ मिटता है. 

धनुर्वात-काली तुलसी की पत्तियों का रस, लहसुन, अदरक, प्याज का रस निकालकर 5 ग्राम रस, रोगी को पिलाएं तथा शरीर पर मलें. इससे धनुर्वात मिट जाता है.

मूत्र वीर्य विकार- वन तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर मिश्री मिलाकर सेवन करने से मूत्र और वीर्य संबंधी अन्य रोग भी मिट जाते है.

नपुंसकत्व- तुलसी के बीज और गुड़ को मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लीजिए. प्रतिदिन सुबह शाम1-1 गाला खाकर ऊपर से गाय का घाराष्ण दूध (4 माह तक) पीने से नपुंसकत्व दूर होता वीर्य में वृद्धि होती है. नसों में शक्ति आती है. पाचन शक्ति में सुधार होता है और हर प्रकार से हताश पुरुष भी सशक्त के पात्र में रात को पानी में भिगो दीजिए प्रातः इलायची के बीज डालकर अच्छी तरह पीस

स्वप्न दोष- 10 ग्राम तुलसी के बीज, मिट्टी काल 15 दाने बादाम की गिरियां तथा 14 छोटी बन जाता है. लीजिए. आवश्यकतानुसार शक्कर डालकर भांग की तरह सेवन कीजिए. इससे स्वप्नदोष बंद हो जाता है.

प्रदररोग- (1) तुलसी की पत्तियों का स्वरस 20 ग्राम, चावल के मांड के साथ सेवन करने तथा दूध भात या घी भात का पथ्य लेने से प्रदर रोग दूर होता है. (2) तुलसी की 2 मंजिरियां खाकर ऊपर 2 केले सुबह शाम खाने से प्रदर रोग दूर होता है.

बांझपन- तुलसी के बीज में स्निग्धता का जो गुण है वह स्त्रियों के जननेन्द्रिय संबंधी रोगों में अत्यंत लाभकारक है. यदि स्त्रियों में मासिक धर्म में रुकावट आ जाए तो तुलसी के बीजों से | लाभ होता है. गर्भाशय की शुद्धि के लिए पान

के साथ तुलसी के बीज पीसकर मासिक धर्म के समय 3 दिन तक पिलाइए. इससे गर्भधारण करने में सहायता मिलती है. जिस स्त्री को संतान न होती हो वह यदि एक वर्ष तक इस दवा का सेवन करती रहे तो सगर्भा बनती है. तुलसी की पत्तियों के काढ़े के अलावा तुलसी का शर्बत, तुलसी के बीजों का चूर्ण भी उपयोगी सिद्ध हुए है. पहले कुछ समय काढ़े का उपयोग करके अंगों की शुद्धि की जाए और फिर बीज के प्रयोग से गर्भाशय को शक्ति शाली बनाया जाए तो संतानोत्पत्ति की संभावना अवश्य ही बढ़ सकती

मलेरिया ज्वर- तुलसी पत्तियां 11, काली मिर्च, 5 अद्रक गुड मिलाकर काढ़ा बनाये. दिन में 2 बार गर्म-गर्म पिए. फिर कंबल ओढ़कर सो जाएं. या काढ़ा मलेरिया ज्वर को दूर करता है.

निमोनिया- तुलसी की पत्तियों का रस, काली मिर्च, चूर्ण, अद्रक का रस, पिप्पली का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से सर्दी, ज्वर, निमोनिया में लाभ होता है. भूख लगती है.

पथरी-तुलसी के रस में शहद मिलाकर देने से किडनी की पथरी में लाभ होता है. तुलसी किडनी की कार्य शक्ति में वृद्धि करती है. प्रयोग छ माह तक करें.

कैन्सर- 1/2 किलो गाय का दूध गरम करके उसमें 50-60 कृष्ण तुलसी के पत्ते डालकर दही जमाना चाहिये. वह दही अगले 12 घंटे में नोवन करना चाहिये, बासे दही का प्रयोग न करें. रोज ताजा दही जमाना चाहिये, तेल, मिर्च, खटाई से परहेज करें, जिन लोगों को कफ या दमा की शिकायत हो वे दूध में कृष्ण तुलसी की पत्ती उबालकर काली मिर्च सोंठ का मसाला डालकर सुबह शाम पियें अनुभव सिद्ध प्रयोग है. साथ में चुंबक चिकित्सा भी अति लाभकारी है.

सावधानियां-गर्मी के रोग वाले, दाहवाले, उष्ण प्रकृतिवाले व्यक्तियों को ग्रीष्म शरद ऋतु में दूध के साथ तुलसी का सेवन कभी नहीं करना चाहिये. अर्श मस्से के रोगियों को तुलसी और काली मिर्च का उपयोग लंबे समय तक नहीं, करना चाहिये, क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है. इस तरह मानव जीवन में तुलसी को महत्वपूर्ण तथा श्रद्धेय स्थान मिला है. इसलिए सभी प्रकार की धार्मिक विधि या पूजा में तुलसी अनिवार्य है.



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