Sharab Ke Nuksan शराब के नुकसान

By D.G Marketing - 12:27 pm

शराब के नुकसान 


शराब से दिमाग खराब होता है

             कई बार किसी ऐसे व्यक्ति को देखकर अचानक मुंह से यह निकल जाता है, "वो देखो शराबी आ रहा है.'' वास्तव में शराब पीने के बाद लोगों का चेहरा बदल जाता है. हाथ-पांव में बदलाव जिन्हें साफ महसूस किये जाता है इनके कदमों में संतुलन का बराबर न होना, आवाज का का भारीपन, हाव-भाव में बदलाव, लड़खड़ाना आदि है. नाखूनों का रंग भूरा एवं हाथ-पांवों में सूजन, आंखों का लाल होना, शराब का असर सीधे मस्तिष्क पर होता है, उसी की वजह से शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यप्रणाली गडबड़ा जाती है. शराब पीने से कामकाज पर दुष्प्रभाव पड़ता है. इसलिये चीजें धुंधली या अस्पष्ट दिखाई देने लगती है. यह मस्तिष्क का वो भाग है जो गतिमान घटनाओं पर नजर रखता है इससे नियंत्रण हटने पर नजर में कमियां उत्पन्न होती है. निर्णय लेने की क्षमता खोने लगता है, हाथों और नजर के बीच का तालमेल भी घट जाता है. शराबी को सामने की चीजें साफ दिखाई नहीं देती, आंखों के आगे अंधेरा या धुंधलापन महसूस होता है जिससे दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है. 

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            पहले कदम में शराबी उत्तेजित व क्रोधी हो जाता है और लड़ने पर उतर आता है. आवाज में भारीपन व हिंसक भी हो सकता है. नींद में सो जाता है. अगली सुबह जागने पर उसे कुछ भी याद नहीं रहता. मस्तिष्क का ऊपरी भाग बड़ी-बड़ी गतिविधियों को संचालित करता है. कई केंद्रों से इन्हें संकेत मिलते हैं, कुछ केंद्र ऐसे हैं जो व्यक्ति को उत्तेजित करते हैं और कुछ केंद्र इच्छाओं का दमन.सामान्य व्यक्ति में दोनों प्रकार के केंद्रों का संतुलन होता है. वह सही ढंग से काम भी करता है. शराब पीने के बाद प्रारंभिक अवस्था में दमनकारी केंद्रों के न्युरोन की गतिविधियां नियंत्रित हो जाती है जिससे व्यक्ति का संयम समाप्त हो जाता है. जरा-जरा-सी बातों पर चिढ़ना, क्रोध करना आदि करने लगता है. शराब की मात्रा बढ़ने लगती है तब वह उंघने लगता है, इसी की वजह से कभी-कभी ऐसा देखने में आता है कि शराब पीने के बाद धीरे- धीरे वह बेहोश हो जाता है. 

            काफी अध्ययनों के बाद पता चला है कि प्रति 100 मिलीलीटर खून में अल्कोहल की मात्रा का 400 मि. ग्राम से अधिक होना प्राणघातक भी हो सकता है, इसका सीधा संबंध अलग-अलग व्यक्तियों में अलग अलग होता है. शराब पिया हुआ कोई व्यक्ति नशे की हालत में गिरकर सिर पर चोट लगा सकता है इससे उसके मस्तिष्क पर बहुत खराब असर पड़ सकता है, कभी कभी लड़ाई-झगड़े में या कभी अपने आपको चोट पहुंचाने पर भी मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव पड़ने लगता है. अगर कोई व्यक्ति यह कहे कि बिना शराब के अब जिंदा रह नहीं सकता, दरअसल बात यह है कि वह शराव अंधाधुंध पीता है, अपने सवस्थ्य की तरफ से बेखबर रहता है, उसका स्वास्थ्य धीरे धीरे रसातल की ओर चला जाता है और आये दिन वह किसी न किसी बीमारी से परेशान रहता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से शराब पीता है तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलते है. 

मस्तिष्क के जिन भागों पर इसके दुष्परिणाम होते है वे हैं

1. कोरटैक्स- यह मस्तिष्क वह भाग है जो उच्च श्रेणी की गतिविधियों के लिये जिम्मेदार है. यही भाग इंसान को जानवरों से अलग इंसानी गुण प्रदान करता है. अगर कोई शराब का व्यसनी हो तो उसकी निर्णय क्षमता, स्मरण शक्ति और विशेषण शक्ति कमजोर पड़ जाती है. बाहरी पदार्थों के : प्रति उसकी प्रतिक्रिया कमजोर होती जाती है. वह शंकालु, डरपोक, ईर्ष्यालु हो जाता है. हमारे स्वभाव में भी इस तरह के बदलाव आते हैं इस परिस्थिति को लगातार शराब पीने वाले के मस्तिष्क का आकार कम होने लगता है. आजकल आधुनिक यंत्रों द्वारा इस बात का पता लगाया जा सकता है कि मस्तिष्क पर किस तरह के दुष्प्रभाव हुये हैं. उस यंत्र का नाम है-सिटी स्केनिंग.


2. अनुमस्तिष्क -    यह संतुलनकारी पहलुओं पर नजर रखता है. मनुष्यों के विभिन्न अंगों में तालमेल का होना बेहद जरूरी है परंतु शराब पीने के बाद यह शक्ति क्षीण होती जाती है. उसके पांव लड़खड़ाने लगता है, जुबान बदल जाती है, नजर साफ नहीं रहती. अगर शराब नित्यदिन पीता रहे तो इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है कि उससे निजात पाना मुश्किल है.


3. ब्रेन स्टेम -     मस्तिष्क के एक और भाग पर गलत असर पड़ सकता है. यह विभिन्न शारीरिक अंगों में शक्ति का संचालन करता है. इसमें खराबी आने पर हाथ पांवों की सामान्य क्षमता, हिलाना-डुलाना इन सबमें अचेतना पैदा होती है याने शून्यता. वस्तुओं को पकड़ने घसीटने, उठाने में तकलीफ होती है. ऐसा अनुभव होता है जैसे अपाहिज हो गये हो. निगलने और बोलने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. हकलाहट की स्थिति पैदा होती है.


4.आप्टिक नर्व -     अधिक शराब सेवन से आंखों की नसों पर भी बुरा असर पड़ता है जो मस्तिष्क और आंखों के संतुलन का काम देखती हैं. इस स्नायु में खराबी आ जाने से नजर में कमजोरी, धुंधलापन, रंगों का दिखाई न देना, दृष्टि क्षीणता आदि समस्यायें पैदा होती हैं.

शराब छोड़ने का आसान नुस्खा 

            ऐसे विज्ञापन आज आम हो गये हैं जिनमें दावा किया जाता है आप शराबी को बिना बताये उनकी दावा को खाने की चीज में मिलाकर मरीज को खिला दें तो शराबी शराब से नफरत करने लगेगा. हमारे देश में लाखों परिवार पर के माधर्ताकी शराबखोरी की वजह से बर्बाद हो रहे हैं, स्वाभाविक है कि उनके घरवाले इस विज्ञापनों से आकर्षित हो यह आसान सा इलाज करने के लिये तुरंत राजी हो जाते हैं और इसी का फायदा ये तथा कथित वैद्य उठाते हैं. दरअसल बाजार में दो ऐसी दवाइयां मिलती हैं जिनका इस्तेमाल व्यसन मुक्ति केंद पर शराब छुड़ाने के लिये किया जाता है. दवाओं की विशेषता यह है कि इनके सेवा के पश्चात यदि शराब पी जाये तो शराब और दवा के मेल से कुछ ऐसी रासायनिक क्रियाएं होती हैं जिसके फलस्वरूप मरीज को पेट में तीव्र दर्द होता है, पसीना छूटने लगता है और उल्टी हो जाती है, मरीज यह समझता है कि उसे यह सब शराब पीने की वजह से हो रहा है. 
            मगर पढ़ने-सुनने में बड़ा आसान-सा लगने वाला यह तरीका इतना सरल नहीं है. इन दवाओं को रोज ही इस्तेमाल करना पड़ता क्योंकि इनका असर बहुत सीमित समय के लिये होता है. दूसरे इन दवाओं का असर खत्म होते ही शराबी फिर से शराब पीना शुरू कर देता है और बिन चिकित्सक की देखरेख में इस दवा का इस्तेमाल करना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि इससे उत्पन्न लक्षण कभी- कभी मरीज की जान भी ले सकते हैं, इसलिये ऐसे विज्ञापनों से आकर्षित होकर इन दवाओं को खरीदने से पहले जरा सोचिये, क्या वाकई शराबी की शराब छुड़ाना इतना आसान है?


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