Khajur Ke Fyde

By D.G Marketing - 11:31 am

खजूर के फायदे 

          हमारे देश में प्राचीन काल से Khajurका उपयोग श्रमहर पदार्थ के रूप में यूज़ कर रहे हैं। Khajur उष्ण जलवायु एवं मरुस्थलीय प्रदेशों का फल है। फलों में Khajur Ke Fyde कई प्रकार के महत्त्व होते है। खजूर को वृक्ष पर पकने के लिये सूर्य की प्रखर धूप आवश्यक मानी जाती है। खजूर की उत्पत्ति सुलेमान नामक देश (अरवस्थान) में हुई है अत: इसे सुलेमानी कहते हैं. इसके फलों खजूर या छुहारा, बीजों, फूलों और पत्तोंका औषधि के रूप में उपयोग होता है। खजूर के पूर्ण रूप से पके हुये, गीले, रसदार, फलों को 'खजूर' कहते हैं और खजूरी के अधपके सूखे फलों को 'छुहारा' कहते हैं।

            खाद्य पदार्थ के रूप में इसका काफी महत्त्व है। इसे 'सहारा की रोटी' कहा जाता है। परंतु खाद्य के रूप में इसका उपयोग सर्वव्यापी है। यह पहला फल है जिसकी खेती मनुष्य द्वारा की गई है। मेसोपोटामिया में करीब पाँच हजार वर्ष पूर्व ऐसी ईंटें पाई गई हैं जिन पर Khajur के बारे में निर्देश खुदे हुए हैं। मिस्र के प्राचीन स्मारकों में खजूरों के चित्र खुदे हुए हैं। 'बाइबल' में इसके अनेक संदर्भ मिलते हैं।


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आहार मूल्य

               कैल्सियम, पोटैसियम, लौह आदि खनिज का भंडार Khajurअशक्तता के रोगियों के लिये श्रेष्ठ उपहार है. शरीर में रक्त की कमी को दूर कर Khajur थकावट दूर करता है तथा शरीर में शक्कर की पूर्ति करता है. इसके सेवन से शरीर में रक्त खूब बनता है. खजूर में कफ-नि:सारक गुण है अत: क्षयरोग में इसका उपयोग हितकारक है. Khajur सभी धातुओं को पुष्ट करती है. यह हृदय के लिये भी हितकारी है. खून जम गया हो तो उसमें भी खजूर का सेवन अत्यंत उपयोगी है. खूजर का सेवन करने से संधिवात, कमरदर्द, कफवाला, जुकाम में भी लाभ होता है. गांधीजी ने भी खजूर , बकरी के दूध और फलों से ही अपना स्वास्थ्य अच्छी तरह सुरक्षित रखा था. 
            
                पोषक के रूप में इसका काफी महत्त्व है। अपने भार का करीब 60 प्रतिशत ग्लूकोज तथा फ्रक्टोज के रूप में इसमें प्राकृतिक शर्करा है। इसकी शर्करा आसानी से पच जाती है। इस प्रकार गन्ने में प्राप्त होनेवाली शर्करा से यह श्रेष्ठ है। 

            Khajur का प्रयोग रोगाणुओं पर नियंत्रण रखता है तथा आँतों में स्वस्थ बैक्टीरिया उत्पन्न करता है। यह शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति तुरंत करता है और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करता है।
 खजूरों का उपयोग कई तरह से किया जाता है। दूध के साथ लेने से खजूर की पौष्टिकता काफी बढ़ जाती है। सहारा के धनी लोग इसे मक्खन के साथ लेते हैं। वे इसके बीज को निकालकर उसमें मक्खन भर देते हैं और तब बड़े चाव से खाते हैं। वसा प्राप्त करने का यह वैज्ञानिक तरीका है। 

            खजूर को पकाने के भी विभिन्न तरीके हैं। उबले दूध में इसे मिला देने से बहुत स्वादिष्ट तथा पौष्टिक पेय तैयार होता है। इसे पुडिंग के रूप में खाया जाता है। इसके लिए Khajur को टुकड़ों में काटकर दूध में उबाल लिया जाता है। गाढ़ा बनाने के लिए उसमें थोड़ा सा आटा मिला दिया जाता है। खजूर से जैम, जेली तथा मुरब्बा आदि भी बनाए जा सकते हैं। 

Khajur के औषधीय गुण 

            अनेक बीमारियों में Khajur का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है। खजूर को घिसकर, पानी में मिलाकर पीने से शराब की उत्तेजना दूर हो जाती है। स्वच्छ एवं ताजा खजूर दूध में मिलाकर पीने से यह बच्चों तथा वयस्कों को समान पुष्ट करता है। विशेषकर बुखार के बाद स्वास्थ्य-लाभ के दौरान यह पौष्टिक पेय देना चाहिए। सूखा खजूर , जिसे छुहारा के रूप में जाना जाता है, बादाम, पिस्ते की गिरियाँ तथा पेठा के बीजों के पाउडर के मिश्रण के सेवन से काम-शक्ति में काफी वृद्धि होती है। फल के बीजों को भूनकर कॉफी की तरह का पेय बनाया जा सकता है। इस पेय को 'खजूर कॉफी' कहते हैं। पिसे हुए बीजों से आँखों का मरहम तैयार किया जा सकता है।

            यह कब्ज में बहुत लाभकारी है, क्योंकि इसके रेशे आँतों की सफाई में सहायता करते हैं। इसके क्षारीय तत्त्व अम्लता को कम करते हैं। इसके निकोटिन अम्ल त्वचा के विकार, आँतों की गड़बड़ियों, स्नायुओं, सिरदर्द तथा अनिद्रा को ठीक करते हैं। Khajur का मीठा रस भी तैयार किया जाता है। इसे ताजा भी सेवन किया जा सकता है और इसका गुड़ भी बनाया जाता है। खजूर के रस से खमीर बनाया जा सकता है तथा इससे अल्कोहल भी तैयार किया जा सकता है। नज़र डालते है कुछ घरेलु Khajur Ke Fyde

खांसी -  Khajur, छोटी पीपल, शहद सबको समभाग लें. इन सभी वस्तुओं को महीन करके परस्पर मिला लें. इसकी 20 ग्राम मात्रा प्रतिदिन प्रात: सायं दूध के साथ सेवन करने से साधारण खांसी, पुरानी खांसी, तपेदिक की खांसी तथा दमा सब में लाभ होता है. 

कब्जियत, कृशांगता - रात को 4 नग छुहारे दूध में उबालकर खाने से कब्ज दूर हो जाता है. शरीर में रक्त, वीर्य, सांस की वृद्धि होती है. मोटापा और नव-स्फूर्ति बढ़ती है. 

दस्त एवं अतिसार - खजूर 10 ग्राम, मधु 5 ग्राम खजूर को पत्थर पर पीसकर तथा मधु मिश्रित कर बच्चों को दांत निकलते समय चटाना प्रभावी औषधि है 

नेन्न व्याधि - खजूर के बीज का पेस्ट पलकों के ऊपर लेपन करने से नेत्र व्याधि में आराम मिलता है स्रायविक क्षीणता- 200 ग्राम बकरी के दूध में 30 ग्राम Khajur रातभर भिगाकर प्रात: इसी दूध में खजूर को पीसकर मधुएवं इलायची चूर्ण मिलाकर सेवन करने से स्वास्थ्य प्रसन्न रहता है. रक्त में वृद्धि होती है. 

बिस्तर में पेशाब करना -  बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हों तो नित्य रात को कुछ दिन 2 छुआरे (सूखा खजूर) खिलायें. बूढ़े आदमी को पेशाब बार-बार होने से दिन में दो बार छुहारे खिलायें, रात में छुआरा खाकर दूध पियें. 

मोटापा - 2 छुआरे का चूर्ण दूध में उबालकर उसमें 2 चम्मच मधु मिलाकर खाने से मांस, बल, वीर्य बढ़ता है. शरीर को मोटा करता है. बल देता है. 

शीघ्रपतन - और पतले वीर्य वालों को 2 छुआरे प्रात: नित्य खाने से शुक्राणुओं की पृष्टि होती है. 

शक्तिवर्धक - छुहारे खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग, हड्डियों की कमजोरी दांतों का गलना ठीक होते हैं. स्वास्थ्य ठीक रहता है.

विशेष - छुआरे एक बार में 4 से अधिक नहीं खाने चाहिये, वरना गरम  करते हैं.


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